नपाकी की हालत मे जनाज़ा मे शरीक होना कैसा ?
अस्सालामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु
क्या फरमातें है उलमाए एकराम व मुफ्तियान ए एजा़म मसअला के बारे में कि किसी शख्स पर नापाक छींट पड़ गई है तो क्या वो कब्रिस्तान मैय्यत को दफनाने जा सकता है और अगर उसके उपर गुस्ल फर्ज़ हो तो क्या वो बगैर गुस्ल किये मैय्यत के साथ कब्रिस्तान तक दफनाने को जा सकता है
बहवाला जवाब इनायत फरमाएं मेहरबानी होगी आपकी फक्त वस्सालाम
साइल> सैफी अशहर नूरी कानपुर उत्तर प्रदेश
व अलैकुम अस्सालाम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु
अल जवाब अल्ला हुम्मा हिदायतु अलहक़ बिस्सावाब
जा सकता है कि जिस शख्स पर गुस्ल वाज़िब है उसके लिए मस्जिद मे जाना तवाफ़ करना कुरआन मजीद छूना और पढ़ना किसी आयत का तावीज़ लिखना और छूना आयत वाली अंगुठी छूना पहनना हराम है उनके अलावा अमाले साहेला हराम नही और ना ही उनके लिए तेहारत शर्त है और दफ़्न करने जाना भी मज़कूर अमाल के सिवा है इसलिए उसके लिए भी तेहारत शर्त न होगी अलबत्ता बेहतर नही जैसा कि दुर्रे अल मुख्तार मे है कि
ﻭﻳﺤﺮﻡ ﺑﺎﻟﺤﺪﺙ اﻷﻛﺒﺮ ﺩﺧﻮﻝ ﻣﺴﺠﺪ ﻭﻟﻮ ﻟﻠﻌﺒﻮﺭ ﺇﻻ ﻟﻀﺮﻭﺭﺓ ﺣﻴﺚ ﻻ ﺗﻴﻤﻢ ﻧﺪﺑﺎ ﻭﺇﻥ ﻣﻜﺚ ﻟﺨﻮﻑ ﻓﻮﺟﻮﺑﺎ ﻭﻻ ﻳﺼﻠﻲ ﻭﻻ ﻳﻘﺮﺃ و ﻳﺤﺮﻡ ﺑﻪ ﺗﻼﻭﺓ اﻟﻘﺮﺁﻥ ﻭﻟﻮ ﺩﻭﻥ ﺁﻳﺔ ﻋﻠﻰ اﻟﻤﺨﺘﺎﺭ ﺑﻘﺼﺪﻩ ﻭﻣﺴﻪو ﻳﺤﺮﻡ ﺑﻪ ﻃﻮاﻑ ﻟﻮﺟﻮﺏ اﻟﻄﻬﺎﺭﺓ ﻓﻴﻪ ﻭ ﻳﺤﺮﻡ ﺑﻪ ﺃﻱ ﺑﺎﻷﻛﺒﺮ ﻭﺑﺎﻷﺻﻐﺮ ﻣﺲ ﻣﺼﺤﻒ ﺃﻱ ﻣﺎ ﻓﻴﻪ ﺁﻳﺔ ﻛﺪﺭﻫﻢ ﻭﺟﺪاﺭ ملتقطا(ردالمحتار ج١ ص٣٤٣ تا ٣٤٨)
(हवाला दुर्रे अल मुख्तार जिल्द 01 सफा नः 343 ता 348)
और बहार ए शरीअत मे है कि जिसको नहाने की जरूरत हो उसको मस्जिद मे जाना तवाफ़ करना कुरआन मज़ीद छूना अरग चिह उसका सादा हाशिया या जिल्द या चौली छूऐ या बे छूऐ देख कर या ज़बानी पढ़ना या किसी आयत का लिखना या आयत का तावीज़ लिखना या एैसा तावीज़ छूना या ऐैसी अंगुठी छूना या पहनना जैसे मुक़्ताआत की अंगूठी हराम है
(बहवाला बहार ए शरीअत हिस्सा 02 सफा नः 326)
वल्लाहो आलमु बिस्सवाब
कत्बा शान मोहम्मद मिस्बाही क़ादरी
हिन्दी ट्रांसलेट नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रजा़ रज़वी
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बाब जनाज़ा